बहुत कम लोग जानते हैं कि शानी जी कहानीकार और उपन्यासकार के अलावा न सिर्फ कविताओं की अच्छी समझ रखते थे बल्कि खुद कुछ कविताएं भी लिखी...यहां मैं अनुवादित कुछ कविताएं पोस्ट कर रहा हूं शायद आप लोगों को पसंद आएं.......
खोज
1) बर्फ़ के तारे
पहाड़ियां चाहती हैं
पानी हो जाएं
और पीठ में खोजती हैं वे
टिकने के लिए खोजती हैं वे
सितारे!!!
2) बादल
और चाहती हैं पहाड़ियां
निकल आएं उनके पंख
और खोजती हैं वे
बादल
सफ़ेद बुर्राक़!!!!
3) बर्फ़
तारे हो रहें हैं बेपर्द
झरते हैं पठारों पर
सितारों के लिबास
ज़रुर आएंगे तीरथ यात्री
और खोजेंगे आर्तनाद
कल के बुझे हुए अलाव!!!!!!!!
सिरफिरा गीत
मां,
चांदी कर दो मुझे
बेटे,
बहुत सर्द हो जाओगे तुम
मां,
पानी कर दो मुझे
बेटे,
जम जाओगे तुम बहुत
मां,
काढ़ लो मुझे तकिए पर
कशीदे की तरह
कशीदा!!!!!
हां,
आओ
सुनहरी लड़की का क़सीदा
तालाब में नहा रही थी
सुनहरी लड़की
और तालाब सोना हो गया
कंपकपी भर गए उसमें,
छायादार शाख़ और शैवाल
और गाती थी कोयल
सफ़ेद पड़ गई लड़की के वास्ते
आई उजली रात
बदलियां चांदी की गोटों वाली
खलवाट पहाड़ियों और बदरंग हवा के बीच
लड़की थी भीगी हुई जल में सफेद
और पानी था दहकता बेपनाह
फिर आई ऊषा
हज़ारों चेहरों में
सख्त और लुके-छुपे
मुंजमिद गजरों के साथ
लड़की आंसू ही आंसू
शोलों में नहायी
जबकि स्याही पंकों में
रोती थी कोयल
सुनहरी लड़की थी
सफेद बगुली
और तालाब हो गया था सोना!!!!!
काले फ़ाख्तों का कसीदा
चम्पा की शाख़ों के बीच
मैंने देखे दो स्याह फ़ाख्ते
सूरज था एक
चांद था दूसरा
प्यारे दोस्तों,
कहां है मकॉबरा मेरा, मैंने पूछा
मेरी दुम में, सूर्य ने कहा
हलक़ में मेरे, चांद बोला
और कमर कमर तक मिट्टी में
चलते हुए मैंने देखे
दो बर्फ़ानी उक़ाब
और एक लड़की निर्वस्त्र
दोनों थे एक
और लड़की न तो ये थी न तो वो
प्यारे दोस्तों,
कहां है मकॉबरा मेरा, मैंने पूछा
मेरी दुम में, सूर्य ने कहा
हलक़ में मेरे, चांद बोला
चम्पा की शाख़ों के बीच
मैंने देखे दो फ़ाख्ते निर्वस्त्र
दोनों थे एक
और दोनों न तो यह और न वो!!!!!!
मूल: फेदरिको गार्सिया लोर्का
अनु: शानी
खोज
1) बर्फ़ के तारे
पहाड़ियां चाहती हैं
पानी हो जाएं
और पीठ में खोजती हैं वे
टिकने के लिए खोजती हैं वे
सितारे!!!
2) बादल
और चाहती हैं पहाड़ियां
निकल आएं उनके पंख
और खोजती हैं वे
बादल
सफ़ेद बुर्राक़!!!!
3) बर्फ़
तारे हो रहें हैं बेपर्द
झरते हैं पठारों पर
सितारों के लिबास
ज़रुर आएंगे तीरथ यात्री
और खोजेंगे आर्तनाद
कल के बुझे हुए अलाव!!!!!!!!
सिरफिरा गीत
मां,
चांदी कर दो मुझे
बेटे,
बहुत सर्द हो जाओगे तुम
मां,
पानी कर दो मुझे
बेटे,
जम जाओगे तुम बहुत
मां,
काढ़ लो मुझे तकिए पर
कशीदे की तरह
कशीदा!!!!!
हां,
आओ
सुनहरी लड़की का क़सीदा
तालाब में नहा रही थी
सुनहरी लड़की
और तालाब सोना हो गया
कंपकपी भर गए उसमें,
छायादार शाख़ और शैवाल
और गाती थी कोयल
सफ़ेद पड़ गई लड़की के वास्ते
आई उजली रात
बदलियां चांदी की गोटों वाली
खलवाट पहाड़ियों और बदरंग हवा के बीच
लड़की थी भीगी हुई जल में सफेद
और पानी था दहकता बेपनाह
फिर आई ऊषा
हज़ारों चेहरों में
सख्त और लुके-छुपे
मुंजमिद गजरों के साथ
लड़की आंसू ही आंसू
शोलों में नहायी
जबकि स्याही पंकों में
रोती थी कोयल
सुनहरी लड़की थी
सफेद बगुली
और तालाब हो गया था सोना!!!!!
काले फ़ाख्तों का कसीदा
चम्पा की शाख़ों के बीच
मैंने देखे दो स्याह फ़ाख्ते
सूरज था एक
चांद था दूसरा
प्यारे दोस्तों,
कहां है मकॉबरा मेरा, मैंने पूछा
मेरी दुम में, सूर्य ने कहा
हलक़ में मेरे, चांद बोला
और कमर कमर तक मिट्टी में
चलते हुए मैंने देखे
दो बर्फ़ानी उक़ाब
और एक लड़की निर्वस्त्र
दोनों थे एक
और लड़की न तो ये थी न तो वो
प्यारे दोस्तों,
कहां है मकॉबरा मेरा, मैंने पूछा
मेरी दुम में, सूर्य ने कहा
हलक़ में मेरे, चांद बोला
चम्पा की शाख़ों के बीच
मैंने देखे दो फ़ाख्ते निर्वस्त्र
दोनों थे एक
और दोनों न तो यह और न वो!!!!!!
मूल: फेदरिको गार्सिया लोर्का
अनु: शानी

